सार्थक जीवन
मित्रों,
आप और मैं एक अद्भुत आश्चर्य कर्म का जीवित सबूत है!! क्या आप जानते हैं, आपके इस संसार में न होने की 300 मिलियन या 30 करोड़ संभावनाएं थी? यह कोई छोटी संख्या नहीं है। यदि यह सभी संभावनाएं साकार हो जाएं तो अमेरिका जितना बड़ा देश बन जाए। किंतु उन सभी संभावनाओं को पीछे छड़ते हुए आप, जी हां 'आप' अस्तित्व मे हैं। यदि यह 30 करोड़ संभावनाएं सरकार भी हो जातीं, तो आपसे मेल खते अनेकभई बहन होते किंतु आप नहीं होते । आप अद्वितीय हैं।
हम अक्सर दादा- दादी माता-पिता के मुख से सुनते हैं, की हमारा बेटा; कि हमारी बेटी तो लाखों में एक है; तो वे गलत नहीं कहते! आप और मैं तो करोड़ों में एक हैं।
तो यह स्वापरिलक्षित है की जीवनदाता ने आपको और मुझे विशेषतौर, पर अन्य संभावनाओं को निरस्त करते हए,
चुना है। आपके अस्तित्व में आने के पूर्व ही आपका चुनाव हो चुका है। अर्थात आपका जन्म पूर्व नियोजित था।
स्पष्ट है कि जन्मदाता के उद्देश्य को अपने जीवन से पूर्ण करने मे ही इस जीवन की सार्थकता है।
अपने सांसारिक जीवन के पूर्व हम परमेश्वर की कल्पना में थे हमारे सांसारिक जीवन के द्वारा परमेश्वर ने अपनी कल्पना को साकार किया किया है। हमारा कर्तव्य है कि हम परमेश्वर की उस कल्पना को
अपने जीवन के द्वारा साकार करें। अपनेजवन को परमेश्वर को भावता हआ बलिदान करके अर्पित करें। यदि हम ऐसा करतेहैं, तो अपने जीवन से परमेश्वर की भली इच्छा को प्रकट करते हैं।
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